रविवार, 5 अप्रैल 2020
मारा मारा फिरता हूं
तुम्हें मैं प्यार करता हूं
बेंचेते ईमान हैं
इश्क की बीमारी
चाहे जहाँ देखा अब इश्क की बीमारी बढी़।
सभ्यता व संस्कृति आपन भुलान हैं ।।
हाय हाय हैलो हैलो आई लव यू कहे जांय।
सोंच गन्दी कइके अब बनत सयान हैं।।
प्यार शब्द देखा आज बदनाम होइ गवा।
खेल जिस्म कइ तौ अब बढ़त दुकान हैं।।
रहीम आशा गली गली जहाँ देखा घूम रहे।
कइसेन ई देश अब बनत महान हैं ।।
कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त"
9918140485
मेरी मौत का पैग़ाम
पता मुझको है मेरी मौत का पैगाम आएगा।
साथ दौलत ख़ज़ाना और न धन धाम जाएगा।
अरुणानन्त अवसर खोजता हूं देश सेवा का,
यही सदकार्य का प्रतिफल हमारे काम आएगा।
कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त" अयोध्या
9918140485
इज्जत
पहले के जैसी इज्जत दिल में नहीं रही।
जीवन बदल लूं हिम्मत मुझमें नहीं रही।
कहते थे साथ छोड़ेगें तेरा न हम कभी,
लगता है वो मोहब्बत उसमें नहीं रही।
🌷✍️कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त" (अयोध्या)
9918140485
मौजों के समंदर में
चाहतों का गला
तुझसे नजरें
तुझसे नजरें मिली की मिली रह गयी।
उगते सूरज के जैसे कली खिल गयी।
प्यार में पग मेरे दो जो आगे बढ़े,
स्वर्ग सा सुख मिला जब मुझे मिल गयी।
कवि अनन्त (अयोध्या)
9918140485
वो बात नहीं है
पहले के जैसे तुझमें वो अब बात नहीं है।
हमसे न मिली थी कभी तू साथ नहीं है।
चाहा था तुझे चाहतें दिल में ही रह गईं,
तुम हो अमीर पाने की औकात नहीं है।
अरुण द्विवेदी "अनन्त''
अयोध्या 9918140485
कसम
कसम है राम की मुझको कभी मौका हमें देना।
न तोड़े हैं न तोड़ेंगे कभी विश्वास हम तेरा।
तुम्हें अपना बना लेंगे भला ये भूल मैं बैठा,
बने न तुम मेरे खातिर मेरी किस्मत मिटा देना।
कवि अनन्त अयोध्या
9918140485
यादों की दरिया में
मेरी यादों की दरिया में तू जब जब ख्वाब देखोगी।
नजर आऊंगा उस पल मैं तू जब जब चांद देखोगी।
भला मुझसे अगर तुमको कोई यदि मिल भी जाएगा,
करोगी इश्क़ भी उससे नहीं तुम चैन पाओगी।
कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त"
अयोध्या 9918140485
दीपक जलाकर
दीपक जलाकर अंधेरा मिटाओ।
गिरे राह में दीन जन को उठाओ।।
मिटाकर घृणा अपने दिल से चलो तुम।
बनकर प्रखर ज्योति जग में जलो तुम।।
करो स्नेह सबसे ये दिन न गंवाओ।
दीपक जलाकर......................1।।
जीवन मिला व्यर्थ करिए न इसको।
खिला फूल जो नष्ट करिए न इसको।।
तजो द्वेष सबको गले से लगाओ।
दीपक जलाकर....................2।।
किसी आदमी को न छोटा जताओ।
किसी भी पथिक को कभी न सताओ।।
बढ़ो खुद और सबको आगे बढ़ाओ।
दीपक जलाकर.....................3।।
कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त (अयोध्या)
9918140485
किधर जाऊं मैं
तकदीर है हमारी
अब तो तुम्हारे हाथ में तकदीर है हमारी।
पर सच है दिल में तेरे तस्वीर है हमारी।
आ भी जाओ यारा इतना न तुम सताओ,
जीना बगैर मुमकिन तदवीर है हमारी ।
✍️ अरुण "अनन्त" (अयोध्या)
प्रेम करती मुझे
प्रेम करती मुझे प्रेम मैं भी करूं।
वो दुआ मांगती मैं सलामत रहूं।
हे प्रभु जी है तुमसे ये विनती मेरी,
वो हमारी रहे मैं भी उसका रहूं।
✍️ कवि अनन्त (अयोध्या)
9918140485
तुम जो हो साथ मेरे
हमें तो आपकी केवल मधुर आवाज
हमें तो आपकी केवल मधुर आवाज़ सुननी है।
दिलों में जो गलतफहमी वही तो आज कहनी है।
मिटा दो दूरियां दिल से द्वेष मन में नहीं रखना,
तुम्हारी धुन में पागल हूं वही अब साज सुननी है।
✍️कवि अनन्त (अयोध्या)
9918140485
जय मां भवानी
जय मां भवानी रण चंडिका कहां हैं आप
एक बार मेदिनी पे फिर चली आइए।
बढ़ रही चोरी घूसखोरी वा बलात्कार
ऐसे आताताइयों को आइना दिखाईए।
काट काट पापियों की मुंडियो की माला को
पहनकर गले हार सबको बचाइए।
आज माता भारती की लाज खतरे में लगे
जो हैं देशद्रोही परलोक को पठाइए।
🙏🌷✍️कवि अनन्त (अयोध्या)
9918140485
मैं तो कुछ भी नहीं
🌷मैं तो कुछ भी नहीं तू मोहब्बत मेरी।
🌷न है पहचान कुछ भी तू शोहरत मेरी।
🌷मेरे दिल की है धड़कन तेरे नाम की,
🌷भूल जाना मगर है तू चाहत मेरी।
✍️ कवि अरुण "अनन्त"
🌹 9918140485🌹
प्रेम का दीप
प्रेम का दीप आओ जलाते चलें।
हो जहां तम उजाला बनाते चलें।।
दूरियां न रहे दिल में दिल से कभी।
जो गिरे पथ पे उनको उठाते चलें।।
द्वेष दुर्भाव मन से मिटाकर के हम।
सबको आओ गले से लगाते चलें।।
होगी चहुं ओर खुशियां ही खुशियां जहां।
रोज ऐसी दिवाली मनाते चलें।।
@कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त"
9918140485