रविवार, 5 अप्रैल 2020

मारा मारा फिरता हूं

मारा  मारा  फिरता  हूं  मैं  कोई  भी अब काम नहीं।

छोटी  छोटी  बातों  से भी  मुझको अब आराम नहीं।

मेरे  ही  जज्बातों  से  दुनिया  क्यों  जाने  खेल रही ,

मेरे मुश्किल घड़ियों का लगता कोई अब शाम नहीं।

✍️ अनन्त



तुम्हें मैं प्यार करता हूं

तुम्हें मैं प्यार करता  हूं  मगर मैं कह नहीं पाता।
बिना सोंचे मगर मैं तो  कहीं  भी रह नहीं पाता।
कमी खलती है  जीवन  में  बिना  तेरे कहूं कैसे,
मैं ओछी भावनाओं में कभी भी बह नहीं पाता।
✍️ अनन्त

बेंचेते ईमान हैं

छोड़ धर्म पथ जब बेंचते ईमान हैं, ऐसे खाकी वाले क्या समाज को सुधारेंगे।
चोर बदमाश और बलात्कारी नेता आज, ऐसे लोग देश की तो छवि को बिगाड़ेंगे।
छोड़ लाज शर्म जो कि करने दलाली लगे, ऐसे तो दलाल अब देश को पछाड़ेंगे।
कभी खुद आगे जो कि बढ़ पाएं हैं नहीं, ऐसे लोग दूसरों की जड़ को उखाड़ेंगे।
✍️कवि अनन्त अयोध्या

इश्क की बीमारी

चाहे जहाँ देखा अब इश्क की बीमारी बढी़।
सभ्यता  व  संस्कृति  आपन  भुलान  हैं ।।

हाय हाय हैलो हैलो आई लव यू कहे जांय।
सोंच  गन्दी  कइके  अब  बनत सयान हैं।।

प्यार  शब्द  देखा  आज बदनाम होइ गवा।
खेल जिस्म कइ तौ  अब बढ़त दुकान हैं।।

रहीम आशा गली गली जहाँ देखा घूम रहे।
कइसेन  ई  देश  अब  बनत  महान  हैं ।।
        कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त"
             9918140485

मेरी मौत का पैग़ाम

पता  मुझको  है  मेरी  मौत  का पैगाम आएगा।
साथ दौलत ख़ज़ाना और  न धन धाम जाएगा।
अरुणानन्त  अवसर  खोजता  हूं  देश सेवा का,
यही सदकार्य का प्रतिफल हमारे काम आएगा।
कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त" अयोध्या
9918140485

इज्जत

पहले के जैसी इज्जत दिल में नहीं रही।
जीवन बदल लूं हिम्मत मुझमें नहीं रही।
कहते थे साथ  छोड़ेगें तेरा न हम कभी,
लगता है वो  मोहब्बत उसमें नहीं रही।
🌷✍️कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त" (अयोध्या)
            9918140485

मौजों के समंदर में

अचानक आ गया तूफान मौजों के समंदर में।
उड़ाकर ले गया सर्वस्व अपने संग बवंडर में।
हमारे पास अब  केवल तुम्हारी याद बाकी है,
तुम्हारी मोहनी मूरत बसी है मन के मंदिर में।
कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त"

चाहतों का गला


चाहतों का गला फिर दबाना पड़ेगा।
मुझे खुद को  ही आजमाना पड़ेगा।
न कोई हो शिकवा मोहब्बत भी न हो
मुझे खुद को फिर दफनाना पड़ेगा।
✍️ अनन्त

तुझसे नजरें

तुझसे  नजरें  मिली  की मिली रह  गयी।
उगते  सूरज के  जैसे  कली  खिल गयी।
प्यार  में   पग   मेरे   दो  जो  आगे  बढ़े,
स्वर्ग सा सुख मिला जब मुझे मिल गयी।
कवि अनन्त (अयोध्या)
9918140485

वो बात नहीं है

पहले के जैसे तुझमें वो अब बात नहीं है।
हमसे न मिली  थी  कभी तू साथ नहीं है।
चाहा था  तुझे  चाहतें  दिल में ही रह गईं,
तुम हो अमीर  पाने  की  औकात नहीं है।
अरुण द्विवेदी "अनन्त''
अयोध्या 9918140485

कसम

कसम है राम की मुझको कभी मौका हमें देना।
न तोड़े हैं न तोड़ेंगे  कभी विश्वास हम तेरा।
तुम्हें अपना बना लेंगे भला ये भूल मैं बैठा,
बने न तुम मेरे खातिर मेरी किस्मत मिटा देना।

कवि अनन्त अयोध्या
9918140485

यादों की दरिया में

मेरी यादों की दरिया  में  तू  जब  जब ख्वाब देखोगी।
नजर आऊंगा उस  पल  मैं  तू जब जब चांद देखोगी।
भला मुझसे अगर तुमको कोई यदि मिल भी जाएगा,
करोगी  इश्क़  भी  उससे   नहीं   तुम  चैन  पाओगी।

कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त"
अयोध्या 9918140485

यादों का दिया

तेरी यादों का दिया दिल में जलता रहा।
प्यार उनसे किया फिर बिछड़ता रहा।

दीपक जलाकर

दीपक जलाकर अंधेरा मिटाओ।
गिरे राह में दीन जन को उठाओ।।

मिटाकर घृणा अपने दिल से चलो तुम।
बनकर प्रखर ज्योति जग में जलो तुम।।
करो स्नेह सबसे ये दिन न गंवाओ।
दीपक जलाकर......................1।।

जीवन मिला व्यर्थ करिए न इसको।
खिला फूल जो नष्ट करिए न इसको।।
तजो द्वेष सबको गले से लगाओ।
दीपक जलाकर....................2।।

किसी आदमी को न छोटा जताओ।
किसी भी पथिक को कभी न सताओ।।
बढ़ो खुद और सबको आगे बढ़ाओ।
दीपक जलाकर.....................3।।

कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त (अयोध्या)
           9918140485

किधर जाऊं मैं

आपको छोड़कर के किधर जाऊं मैं।
प्रेम नजरें  घुमा  दो  निखर जाऊं मैं।
है मगर दूरी देखो तो कुछ भी नहीं,
साथ गर आपका तो संवर जाऊं मैं।
कवि अरुण द्विवेदी
 अनन्त

चांदनी रात हो

चांदनी रात हो
आपका साथ हो
✍️कवि अरुण द्विवेदी अनन्त


तकदीर है हमारी

अब तो तुम्हारे हाथ में तकदीर है हमारी।

पर सच है दिल में  तेरे  तस्वीर है हमारी।

आ भी जाओ यारा इतना न तुम सताओ,

जीना  बगैर  मुमकिन तदवीर  है  हमारी ।

✍️ अरुण "अनन्त" (अयोध्या)

प्रेम करती मुझे

प्रेम करती मुझे प्रेम मैं भी करूं।

वो दुआ मांगती मैं सलामत रहूं।

हे प्रभु जी है तुमसे ये विनती मेरी,

वो हमारी  रहे मैं भी उसका रहूं।

✍️ कवि अनन्त (अयोध्या)
         9918140485

तुम जो हो साथ मेरे

तुम जो हो साथ मेरे तो फिर क्या मुझे,
इस जमाने से पल भर ना मतलब कोई।

तुम रहोगे सदा मेरे दिल में ही यूं,
सांस के बिन है तन का न मतलब कोई।
कवि अरुण द्विवेदी अनन्त






हमें तो आपकी केवल मधुर आवाज

हमें तो  आपकी  केवल  मधुर आवाज़ सुननी है।

दिलों में जो गलतफहमी वही तो आज कहनी है।

मिटा दो दूरियां  दिल  से  द्वेष मन में नहीं रखना,

तुम्हारी धुन में पागल हूं वही अब साज सुननी है।

✍️कवि अनन्त (अयोध्या)
       9918140485




जय मां भवानी

जय  मां भवानी  रण चंडिका कहां  हैं आप
एक   बार   मेदिनी   पे  फिर  चली  आइए।
बढ़   रही   चोरी   घूसखोरी   वा  बलात्कार
ऐसे   आताताइयों   को  आइना   दिखाईए।
काट काट पापियों की मुंडियो की माला को
पहनकर    गले     हार    सबको    बचाइए।
आज  माता भारती  की  लाज खतरे में लगे
जो   हैं   देशद्रोही   परलोक   को   पठाइए।

🙏🌷✍️कवि अनन्त (अयोध्या)
               9918140485

मैं तो कुछ भी नहीं

🌷मैं तो कुछ भी  नहीं  तू मोहब्बत मेरी।
🌷न है पहचान कुछ भी तू शोहरत मेरी।
🌷मेरे  दिल की है धड़कन तेरे  नाम की,
🌷भूल  जाना  मगर  है  तू  चाहत  मेरी।

        ✍️ कवि अरुण "अनन्त"
          🌹 9918140485🌹

प्रेम का दीप

प्रेम   का   दीप   आओ   जलाते  चलें।
हो   जहां   तम   उजाला  बनाते  चलें।।

दूरियां  न  रहे  दिल  में  दिल  से  कभी।
जो  गिरे  पथ  पे   उनको  उठाते  चलें।।

द्वेष  दुर्भाव  मन  से   मिटाकर  के  हम।
सबको   आओ   गले   से  लगाते  चलें।।

होगी चहुं ओर खुशियां ही खुशियां जहां।
रोज     ऐसी     दिवाली    मनाते   चलें।।
@कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त"
         9918140485

       
   

आंखें

आंखें हैं  कंटीली  तो  आंखों में चुभने दो।

ये दिल है फरेबी तो इसे दिल में जलने दो।

उम्मीद किया  मैंने  वो  उम्मीद नहीं आयी,

जो प्रेम  उसे  मुझसे  उस  प्रेम में मरने दो।

कवि अरुण द्विवेदी "अनन्त"