मंगलवार, 23 जून 2020

कवि अरुण द्विवेदी अनन्त

(केवल आपके लिए 🌹कहानी दिल का हाल)
पूरा पढ़ लेना✍️☝️😄
जिस प्रकार प्राणी मात्र के लिए दिन रात जरूरी है, हवा पानी जरूरी है, धूप छांव जरूरी है। ठीक उसी प्रकार से जीवन में सुख दुख का मिश्रित भाव भी बहुत ही जरूरी है।
इंसान को जीवन में कभी हताश नहीं होना चाहिए। जिस प्रकार नदी निरंतर प्रवाहमान है। वायु चलायमान है। ठीक वैसे ही इंसान को अपने उन्नति के मार्ग पर सदैव अग्रसर रहना चाहिए। ना की कठिनाइयों से डरकर, हार मानकर अपने कदम को रोक लेना चाहिए। समय को अपने बस में करो, ना कि समय आपको अपने बस में करें। उससे पहले ही आपका अपना ध्येय, लक्ष्य जरूर पुकारता नजर आएगा। बस जरूरत है कि आप अपने उस दृष्टि से उसे पूर्ण करने का संकल्प लें। इंसान तो कठपुतली मात्र है, यह विचार अपने मन से हमेशा के लिए निकालकर, दूर कर दो।
इंसान की दुख की घड़ी में ही परीक्षा होती है। अब देखना यह होता है कि, आप कहां तक सफल होना चाहते हैं। लोगों की बातें सुनना छोड़ दो कि, लोग क्या कहेंगे, समाज क्या कहेगा। इन सब चिंताओं से निकलकर दूर। अपने उज्जवल भविष्य के चमकते हुए सितारे को देखो और समुद्र की भांति अटल होकर अपने सपनों को साकार करो। आप जो भी बनना चाहते हो बनो। रास्ते आपके आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। परिवर्तन प्रकृति का नियम है।
यह सब समझा कर मेरे तन में एक नई स्फूर्ति, ऊर्जा का संचार करने वाली। इस दुनिया की भीड़ में अकेला ही छोड़कर। साथ देने का वादा करके आज मेरे दिल में होते हुए भी दूर हो। जब आप मेरे दिल में हो तो यह दूरी कैसी। छः महीने में एक बार बात करने का ये हुनर भी मुझे बहुत पसंद है, ठीक तुम्हारी तरह। आज आपकी बहुत याद आ रही थी। जीवन में कभी भी सुख की कल्पना नहीं की, आजतक। पर आज कुछ उम्मीद किरणें जगी पर, इसका भी कोई मतलब नहीं। आज एहसास हो रहा है कि, आज मैं भी कुछ और होता। जो आपका साथ मिलता। पर झूठे ख्वाब देखने का मतलब ही क्या? आप जहां भी रहो ईश्वर आपको हमेशा खुश रखें। दुख की बदली आप पर कभी ना आए। आप हमेशा हंसती रहो मुस्कुराती रहो, और हां अपना वादा भूल मत जाना।
काश आज आप यह पोस्ट पढ़कर फोन कर दो।
बस इसी आस में इंतजार करता हुआ आपका अपना
✍️कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
     श्री अयोध्या धाम
     9918140485