भ्रष्ट है जब नियति राजनीती कहूं।
हैं धरा पे धरे आपबीती कहूं।
भूख से जब तड़फ हद से ज्यादा हुई,
ज्ञान गंगा लिए धर्मनीती कहूं।
✍️ कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
दर पे तेरे सर को झुकाने आ गया।
आपसे ही मिलने के बहाने आ गया।
सम्मान ये मिला है जो आपका मुझे,
प्रेम की गंगा में मैं नहाने आ गया।
✍️ कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485
धर्म पथ पर बढूं मां यही प्रार्थना।
सत्य सीढ़ी चढूं मां यही प्रार्थना।
नित्य करता रहूं मां चरण वंदना,
स्वप्न सुंदर गढूं मां यही प्रार्थना।
✍️ कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485
मरें हम भूख से लेकिन उन्हें करना बहाना है।
नहीं है जेब में पैसे नहीं कोई ठिकाना है।
ज्ञान गंगा बहा जाओ नियम पालन करूं कैसे,
छोड़ कर ए शहर तुझको हमें भी गांव जाना है।
✍️ कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485