नज़रों से दिल पर करते घोटाले।
कभी बंद खुलते जीवन के ताले।
किसी से भरोसा न उम्मीद रखना,
मिश्री जुबां पर हैं मन से ये काले
✍️अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485
इस सूने दिल के आंगन में अब इंतजार तुम्हारा है।
कहां हो ख़्वाब में आने वाले दिल मेरा अब हारा है।
मुमकिन हो यदि आ पाना तो अंत समय में ही आ जाना,
धूप छांव के सुख दुख में ये जीवन तुझपे वारा है।
✍️कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485