रविवार, 28 मार्च 2021

होली

लाल गुलाबी पीली देखो खुशियों की बौछार है होली।
रंग बिरंगे नेह रंग से रंगे गाल त्योहार है होली।

नवरंग सभी रंगीले देखो भर पिचकारी ले आए,
रंगे बाल में उलझा रंग जो निखर जाय तो प्यार है होली।

आओ यारों इसी बहाने इस होली पर ये प्रण ठानें,
भुला दुश्मनी गले लगाएं मिट जाए तकरार है होली।
✍️ ए ए द्विवेदी
श्री अयोध्या धाम
9918140485

सोमवार, 22 मार्च 2021

संबंध सबसे

संबंध  सबसे  गगन  सा  जुड़ा है।
बिना  पंख  स्नेह  से  ही  उड़ा  है।
सभी क्षेत्रवासी का आशीष हो गर,
सुख दुख  में भाई  हमेशा खड़ा है।
✍️ ए ए द्विवेदी 
श्री अयोध्या धाम
9918140485

शुक्रवार, 19 मार्च 2021

ईश्वर मित्रों से मिलवा दो

वही पुराना दिन लौटा दो।
ईश्वर, मित्रों से मिलवा दो।।

कितने भी रहते उदास।
मिलते जब होता हास परिहास।।

छोटे से क्यों बड़े हुए।
याद आता है पल मस्ती भरे।।

आते हैं जब वो दिन याद।
दिल मांगे बस आशीर्वाद।।

वही पुराना दिन लौटा दो।
ईश्वर, मित्रों से मिलवा दो।।.....1

जीवन क्यों ऐसा होता है।
हर पल सबको खोता है।।

शायद फुरसत नहीं किसी को।
दोस्त  जरूरी  नहीं  किसी को।।

इंजीनियर व्यापारी मैनेजर हूं।
कहता है कोई  मैं  डॉक्टर  हूं।।

वही पुराना दिन लौटा दो।
ईश्वर, मित्रों से मिलवा दो।।.....2

पहले का राम और घनश्याम।
अभी व्यस्त हूं बात करूंगा शाम।।

चलो फ़ेसबुक पर मिलते हैं।
व्हाट्सअप पर हाल लिखते हैं।।

जो कहीं कहीं था पागलपन।
क्यों बिखर गया वो अपनापन।।

वही पुराना दिन लौटा दो।
ईश्वर, मित्रों से मिलवा दो।।

कॉलेज  स्कूल की यादें थीं।
वो गली मोहल्ले की बातें थीं।।

दुनियादारी में झूल गए।
ओ आज सभी पल भूल गए।।

सभ्यता को अपने दूर किए।
सब प्राप्त पदों पर फूल गए।।

भूले मित्रों को मित्र बना दो।
न खत्म कभी वो इत्र बना दो।

वही पुराना दिन लौटा दो।
ईश्वर, मित्रों से मिलवा दो।।
आपका अपना ✍️
कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485

गुरुवार, 18 मार्च 2021

वृंदावन कर डाला

वीराना सा महल ये मन का इसको मधुवन कर डाला।
प्रेम  समर्पण  के भावों  से  जीवन वृंदावन कर डाला।
कभी मिलन की बातें होतीं कभी बिछड़ने सा एहसास,
सपने में छूकर ही जिसने तन मन चंदन वन कर डाला।
✍️ ए ए द्विवेदी
श्री अयोध्या धाम
9918140485

रविवार, 14 मार्च 2021

बेटियां

दिल में सदा ही रहती हैं जान बेटियां।
आंगन  व मेरे घर की  हैं शान बेटियां।

परिवार की इज्जत वा पहचान भी यही,
कहते यहां  सभी  क्यों मेहमान बेटियां।

रिश्ते अलग अलग  हैं पर रूप एक ही,
माता बहन वा बीवी अभिमान बेटियां।

भगवन वहीं पे बसते सम्मान हो जहां,
वेदों  ऋचाओं  का  ही हैं  गान बेटियां।
✍️ अरुण द्विवेदी अनन्त
      श्री अयोध्या धाम
      9918140485

शनिवार, 13 मार्च 2021

हमारा दिल


प्यार मुझको तुम्हीं से है मगर क्या तुम भी करती हो।
हमारा दिल तड़फ उठता क्या मुझको याद करती हो।
निभाना  सीख   लेना   तुम   प्रेम  आसान  है  करना,
खुलकर  जिंदगी  जी  लो  जमाने  से  क्या डरती हो।
✍️ ए ए द्विवेदी

अंबर चाहता हूं

ख्वाहिश न फरवरी है दिसंबर चाहता हूं।
तुम   जान  हो  हमारी  नंबर  चाहता  हूं।
मिलने की इतनी जिद भी अच्छी नहीं है,
हूं  जहां  न  खुश  हूं  अंबर  चाहता  हूं।

बुधवार, 10 मार्च 2021

शिव

जब जब धरती पे अत्याचार बढ़ा तब।
धर महाकाल रूप आए भगवान हैं।।

चाहत सुधा की चाह मन में लगाए सभी।
नीलकंठ खुश हुए किए विषपान हैं।।

कण कण हैं बिराजें रोम रोम में समाए।
एक ही हैं सत्य इन पर अभिमान है।।

सबसे बड़े हैं दयालु कृपालु भोले बाबा।
देवों के भी महादेव सबसे महान हैं।

प्रेम विवाह स्वीकार नहीं

अनीति अत्याचार यहां पर यह समाज सह लेता है।
होता है व्यभिचार यहां पर यह समाज सह लेता है।
प्रेम विवाह स्वीकार हो कैसे मानवता वलिवेदी पर,
दुष्कर्म बलात्कार यहां पर यह समाज सह लेता है।
✍️ ए ए द्विवेदी
श्री अयोध्या धाम
9918140485

मंगलवार, 9 मार्च 2021

मिटाता मैं नाम को तुम्हारे

लिखता  हूं  फिर  मिटाता मैं नाम को तुम्हारे।
प्यासा  भटक रहा हूं  लिए  जाम को तुम्हारे।
मरुथल हृदय के पथ में जीवन मिला है बंजर,
दर्शन की  चाह में  हम आए धाम को तुम्हारे।

सोमवार, 8 मार्च 2021

मां

अपने ही आंसुओं से तन धो लेता हूं।
यूं ही अक्सर  सपनों  में  खो लेता हूं।
मुझ जैसा बदनसीब भला कौन होगा,
मां की  याद  आती  है  तो रो लेता हूं।
✍️ ए ए द्विवेदी
श्री अयोध्या धाम


मंगलवार, 2 मार्च 2021