वही पुराना दिन लौटा दो।
ईश्वर, मित्रों से मिलवा दो।।
कितने भी रहते उदास।
मिलते जब होता हास परिहास।।
छोटे से क्यों बड़े हुए।
याद आता है पल मस्ती भरे।।
आते हैं जब वो दिन याद।
दिल मांगे बस आशीर्वाद।।
वही पुराना दिन लौटा दो।
ईश्वर, मित्रों से मिलवा दो।।.....1
जीवन क्यों ऐसा होता है।
हर पल सबको खोता है।।
शायद फुरसत नहीं किसी को।
दोस्त जरूरी नहीं किसी को।।
इंजीनियर व्यापारी मैनेजर हूं।
कहता है कोई मैं डॉक्टर हूं।।
वही पुराना दिन लौटा दो।
ईश्वर, मित्रों से मिलवा दो।।.....2
पहले का राम और घनश्याम।
अभी व्यस्त हूं बात करूंगा शाम।।
चलो फ़ेसबुक पर मिलते हैं।
व्हाट्सअप पर हाल लिखते हैं।।
जो कहीं कहीं था पागलपन।
क्यों बिखर गया वो अपनापन।।
वही पुराना दिन लौटा दो।
ईश्वर, मित्रों से मिलवा दो।।
कॉलेज स्कूल की यादें थीं।
वो गली मोहल्ले की बातें थीं।।
दुनियादारी में झूल गए।
ओ आज सभी पल भूल गए।।
सभ्यता को अपने दूर किए।
सब प्राप्त पदों पर फूल गए।।
भूले मित्रों को मित्र बना दो।
न खत्म कभी वो इत्र बना दो।
वही पुराना दिन लौटा दो।
ईश्वर, मित्रों से मिलवा दो।।
आपका अपना ✍️
कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485