✍️अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485
बहुत देखा दुनिया
बहुत देखे लोग
पर यहां सच्चा कोई नहीं
झूठा ही सही
कोई है,
यहां पे
खरीदार!
जो मेरी खुशियों
मेरे गमों को खरीद सके।
आज अपने सपने
अपनी इच्छाओं
और यहां तक कि
अपने आप को बेचने निकला हूं।
दुनिया की इस भीड़ में।
पर यह क्या?
यहां हर जगह मायूसी
घबराए हुए लोग
इंसानियत के टुकड़े
जहरीली हवाएं
भ्रमित दिशाएं
कोई कुछ तो बोलो
क्या थोड़ी से गुंजाइश है
मेरी ख्वाहिशों को ही
खरीद लो कोई।
मेरी बर्बादी में ही
साथ दो कोई।
गलती किया
इस इंसानी दुनिया में
गमे बाज़ार खुद को बेचने निकला हूं।
✍️अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485