गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

इच्छाएं

ये दुनिया रंगमंच है। हम सबको यहां अपने अपने किरदार को बखूबी निभाना पड़ता है। दुःख का मूल कारण हमारी आवश्कताएं नहीं हमारी इच्छाएं हैं। हमारी आवश्यकताएं तो शायद कभी पूर्ण भी हो सकती हैं। मगर इच्छाएं नहीं। इच्छाएं कभी पूरी नहीं हो सकतीं और ना ही किसी की हुईं हैं आज तक। एक इच्छा पूरी होती है तभी दूसरी खड़ी हो जाती है। इसलिए अगर इस रंगमंच रूपी दुनिया में खुश रहना है तो अपनी इच्छाओं को समेटने का भरपूर प्रयास कीजिए।
✍️अरुण द्विवेदी अनन्त
     श्री अयोध्या धाम
     9918140485

मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

मेरे राम जी

हम सबकी पहचान हैं मेरे राम जी।
भारत के अभिमान हैं मेरे राम जी।
नभ चमकें दिनमान हैं मेरे राम जी।
सहज सरल भगवान हैं मेरे राम जी।
गौरव के प्रतिमान हैं मेरे राम जी।
पूजा हैं अरमान हैं मेरे राम जी।
अंतर्मन के प्राण हैं मेरे राम जी।
✍️अरुण द्विवेदी अनन्त
      श्री अयोध्या धाम
      9918140485

रविवार, 18 अप्रैल 2021

कहीं प्यार तकरार

कहीं इकरार होता है कहीं इनकार होता है।
कहीं पे प्यार होता है कहीं तकरार होता है।
दिखावे के जहां से दूर ही रहिए तो अच्छा है,

शनिवार, 10 अप्रैल 2021

ले लो खबर जो मेरी अख़बार बन रहूंगा

ले लो खबर जो मेरी अख़बार बन रहूंगा।
बन जाओ म्यान मेरी तलवार बन रहूंगा।
घर की मेरे  इज्जत  देवी  हो तुम हमारी,
बन जाओ  नाव मेरी पतवार बन रहूंगा।
✍️ अरुण द्विवेदी अनन्त
      श्री अयोध्या धाम

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

चंद्रमा

चंद्रमा  मानव चरण  से चूर होता  जा रहा है।
विश्व का हर बिंदु ही कम दूर होता जा रहा है।
किंतु क्या बतला सकेगा आज का विज्ञान युग,
आदमी  क्यों  आदमी से  दूर होता  जा रहा है।
✍️राम किशोर तिवारी दादा जी🙏

रविवार, 4 अप्रैल 2021

जुल्फें

पागल मन तब तब होता है।
जब जब जुल्फें लहराती हैं।।


बहुत देखे लोग


बहुत देखा दुनिया
बहुत देखे लोग
पर यहां सच्चा कोई नहीं
झूठा ही सही

कोई है,
यहां पे
खरीदार!
जो मेरी खुशियों
मेरे गमों को खरीद सके।

आज अपने सपने
अपनी इच्छाओं
और यहां तक कि
अपने आप को बेचने निकला हूं।
दुनिया की इस भीड़ में।

पर यह क्या?
यहां हर जगह मायूसी
घबराए हुए लोग
इंसानियत के टुकड़े
जहरीली हवाएं
भ्रमित दिशाएं
कोई कुछ तो बोलो

क्या थोड़ी से गुंजाइश है
मेरी ख्वाहिशों को ही
खरीद लो कोई।
मेरी बर्बादी में ही
साथ दो कोई।
गलती किया
इस इंसानी दुनिया में
गमे बाज़ार खुद को बेचने निकला हूं।
✍️अरुण द्विवेदी अनन्त
      श्री अयोध्या धाम
       9918140485