गुरुवार, 22 जुलाई 2021
हमारा दिल
शुक्रवार, 18 जून 2021
तीन - चार शब्द
मंगलवार, 4 मई 2021
शहीदों को नमन है
गुरुवार, 22 अप्रैल 2021
इच्छाएं
मंगलवार, 20 अप्रैल 2021
मेरे राम जी
रविवार, 18 अप्रैल 2021
कहीं प्यार तकरार
शनिवार, 10 अप्रैल 2021
ले लो खबर जो मेरी अख़बार बन रहूंगा
शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021
चंद्रमा
रविवार, 4 अप्रैल 2021
बहुत देखे लोग
बहुत देखा दुनिया
बहुत देखे लोग
पर यहां सच्चा कोई नहीं
झूठा ही सही
कोई है,
यहां पे
खरीदार!
जो मेरी खुशियों
मेरे गमों को खरीद सके।
आज अपने सपने
अपनी इच्छाओं
और यहां तक कि
अपने आप को बेचने निकला हूं।
दुनिया की इस भीड़ में।
पर यह क्या?
यहां हर जगह मायूसी
घबराए हुए लोग
इंसानियत के टुकड़े
जहरीली हवाएं
भ्रमित दिशाएं
कोई कुछ तो बोलो
क्या थोड़ी से गुंजाइश है
मेरी ख्वाहिशों को ही
खरीद लो कोई।
मेरी बर्बादी में ही
साथ दो कोई।
गलती किया
इस इंसानी दुनिया में
गमे बाज़ार खुद को बेचने निकला हूं।
✍️अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485
रविवार, 28 मार्च 2021
होली
सोमवार, 22 मार्च 2021
संबंध सबसे
शुक्रवार, 19 मार्च 2021
ईश्वर मित्रों से मिलवा दो
गुरुवार, 18 मार्च 2021
वृंदावन कर डाला
रविवार, 14 मार्च 2021
बेटियां
शनिवार, 13 मार्च 2021
हमारा दिल
अंबर चाहता हूं
बुधवार, 10 मार्च 2021
शिव
प्रेम विवाह स्वीकार नहीं
मंगलवार, 9 मार्च 2021
मिटाता मैं नाम को तुम्हारे
सोमवार, 8 मार्च 2021
मां
मंगलवार, 2 मार्च 2021
रविवार, 28 फ़रवरी 2021
मिश्री जुबां
सोमवार, 22 फ़रवरी 2021
गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021
इन्द्रागांधी मैम
सोमवार, 15 फ़रवरी 2021
रविवार, 14 फ़रवरी 2021
भक्त श्रवण
गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021
मोहब्बत
सोमवार, 1 फ़रवरी 2021
इस सूने दिल के आंगन में अब इंतजार तुम्हारा है।कहां हो ख़्वाब में आने वाले दिल मेरा अब हारा है।मुमकिन हो यदि आ पाना तो अंत समय में ही आ जाना,धूप छांव के सुख दुख में ये जीवन तुझपे वारा है।✍️कवि अरुण द्विवेदी अनन्त श्री अयोध्या धाम 9918140485
इस सूने दिल के आंगन में अब इंतजार तुम्हारा है।
कहां हो ख़्वाब में आने वाले दिल मेरा अब हारा है।
मुमकिन हो यदि आ पाना तो अंत समय में ही आ जाना,
धूप छांव के सुख दुख में ये जीवन तुझपे वारा है।
✍️कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485
सोमवार, 25 जनवरी 2021
गणतंत्र दिवस
सोमवार, 11 जनवरी 2021
नवयुवक
शनिवार, 9 जनवरी 2021
हिंदी
नेह की जननी हर भाषा की हिंदी ही वो क्यारी है।
निज भाषा पर गर्व हमें है हिंदी मुझको प्यारी है।
अ से अनपढ़ होकर के हम ज्ञ से ज्ञानी बन जाते,
मां की ममता जैसी लगती, हिंदी मुझको न्यारी है।
✍️कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485