कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
शुक्रवार, 18 जून 2021
तीन - चार शब्द
आइए
रुकिए
आजमाइए
ठहरिए
फिर
तोड़िए
जनाब
ये दिल ही तो है।
✍️ अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम
9918140485
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