आजादी के शोर में बैठे भूखे प्यासे नंगे हैं।
आजादी निर्बल की देखो देशभक्ति में रंगे हैं।
आज़ादी धनवानों की आजादी है बलवानों की,
आजादी का पर्व मनाते होते पर नित दंगे हैं।
खबर यहां सबको है लेकिन बंद जुबां सब देख रहे।
गद्दारी के रंग में रंगे लंबे चौड़े फेंक रहे।
खुदगर्जी ने मानवता को तार तार कर डाला है,
जनमानस के चूल्हे पर मतलब की रोटी सेंक रहे।
वीर शहीदों ने हंस हंसकर खुद को है कुर्बान किया।
भारत मां की रक्षा खातिर जिसने खुद को दान किया।
गर्व करें हम चौड़ा सीना भारतवासी कहलाते,
भाग्य विधाता भारत हैं हम दुनिया ने सम्मान दिया।।
अपने खुशियों की बलि देकर कहां चैन से सोता है।
रहे सदा खुशहाल वतन ये न सपनों में खोता है।
भारत मां के दामन पर कोई दाग कहीं लग जाए न,
सर्वस्व लुटा दे हेतु देश के वो सैनिक ही होता है।
आओ हम सब मिल करके मन में संकल्प विचार करें।
बलिदान धरा के निमित्त हुए प्रणाम उन्हें सतबार करें।
स्वस्थ सदा विकसित भारत हो ज्योतिपुंज निर्माण करें,
उन्नति सबका साथ सभी हों सपनों को साकार करें।
✍️@अरुण द्विवेदी अनन्त
श्री अयोध्या धाम