कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
शुक्रवार, 19 जुलाई 2024
शेर
धूप क्या है छांव क्या है जिंदगी के इस सफर में।
आप आए लंतरानी छांट कर फिर चल दिए।।
अरुण द्विवेदी "अनन्त"
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