शुक्रवार, 19 जुलाई 2024

शेर

धूप क्या है छांव क्या है जिंदगी के इस सफर में।
आप आए लंतरानी छांट कर फिर चल दिए।।
अरुण द्विवेदी "अनन्त"

मंगलवार, 16 जुलाई 2024

आजादी

आजादी  के  शोर   में   बैठे  भूखे  प्यासे  नंगे  हैं।
आजादी  निर्बल  की   देखो  देशभक्ति  में  रंगे  हैं।
आज़ादी धनवानों  की  आजादी  है  बलवानों  की,
आजादी  का  पर्व  मनाते   होते  पर  नित  दंगे  हैं।

खबर यहां सबको है लेकिन बंद जुबां सब देख रहे।
गद्दारी   के   रंग   में   रंगे    लंबे   चौड़े   फेंक   रहे।
खुदगर्जी   ने  मानवता  को  तार  तार  कर डाला है,
जनमानस  के  चूल्हे  पर मतलब की रोटी सेंक रहे।

वीर शहीदों ने हंस  हंसकर  खुद को है कुर्बान किया।
भारत मां की रक्षा खातिर जिसने खुद को दान किया।
गर्व  करें  हम  चौड़ा   सीना   भारतवासी   कहलाते,
भाग्य विधाता भारत हैं  हम दुनिया ने सम्मान दिया।।

अपने खुशियों की  बलि देकर कहां  चैन  से सोता है।
रहे  सदा  खुशहाल  वतन  ये न  सपनों  में  खोता है।
भारत  मां  के  दामन पर कोई  दाग कहीं लग जाए न,
सर्वस्व  लुटा  दे  हेतु  देश के वो  सैनिक  ही  होता है।

आओ हम सब मिल करके मन में संकल्प विचार करें।
बलिदान धरा के निमित्त  हुए प्रणाम उन्हें सतबार करें।
स्वस्थ सदा विकसित भारत हो ज्योतिपुंज निर्माण करें,
उन्नति  सबका  साथ  सभी  हों सपनों को साकार करें।
✍️@अरुण द्विवेदी अनन्त
       श्री अयोध्या धाम

गुरुवार, 22 जुलाई 2021

हमारा दिल


प्यार मुझको तुम्हीं से है मगर क्या तुम भी करती हो।
हमारा दिल तड़फ उठता क्या मुझको याद करती हो।
निभाना  सीख   लेना   तुम   प्रेम  आसान  है  करना,
खुलकर  जिंदगी  जी  लो  जमाने  से  क्या डरती हो।
✍️ ए ए द्विवेदी

शुक्रवार, 18 जून 2021

तीन - चार शब्द

आइए
रुकिए
आजमाइए
ठहरिए
फिर
तोड़िए
जनाब
ये दिल ही तो है।
✍️ अरुण द्विवेदी अनन्त
      श्री अयोध्या धाम
       9918140485

मंगलवार, 4 मई 2021

शहीदों को नमन है


देश की सुरक्षा में जो प्राण अर्पण किये।
पूज्य सैनिकों के बलिदान को नमन है।।
गोली सीने पर खाये पग भी नहीं हटाये।
भारत  के  वीर  बलवान  को  नमन है।।
तन था लहूलुहान मन में भरा था जोश।
देश  प्रेम  से  भरे  गुमान  को  नमन है।।
निज हित  छोड़कर  सीमा पर  डटे रहे।
ऐसे मेरे  हिन्द के  जवान  को  नमन है।।
✍️कवि अरुण द्विवेदी अनन्त
     श्री अयोध्या धाम
     9918140485

गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

इच्छाएं

ये दुनिया रंगमंच है। हम सबको यहां अपने अपने किरदार को बखूबी निभाना पड़ता है। दुःख का मूल कारण हमारी आवश्कताएं नहीं हमारी इच्छाएं हैं। हमारी आवश्यकताएं तो शायद कभी पूर्ण भी हो सकती हैं। मगर इच्छाएं नहीं। इच्छाएं कभी पूरी नहीं हो सकतीं और ना ही किसी की हुईं हैं आज तक। एक इच्छा पूरी होती है तभी दूसरी खड़ी हो जाती है। इसलिए अगर इस रंगमंच रूपी दुनिया में खुश रहना है तो अपनी इच्छाओं को समेटने का भरपूर प्रयास कीजिए।
✍️अरुण द्विवेदी अनन्त
     श्री अयोध्या धाम
     9918140485

मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

मेरे राम जी

हम सबकी पहचान हैं मेरे राम जी।
भारत के अभिमान हैं मेरे राम जी।
नभ चमकें दिनमान हैं मेरे राम जी।
सहज सरल भगवान हैं मेरे राम जी।
गौरव के प्रतिमान हैं मेरे राम जी।
पूजा हैं अरमान हैं मेरे राम जी।
अंतर्मन के प्राण हैं मेरे राम जी।
✍️अरुण द्विवेदी अनन्त
      श्री अयोध्या धाम
      9918140485